Amal Haziri Matloob 7 Days | Get Your Love Back In 7 Days

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Amal Haziri Matloob 7 Days | Get Your Love Back In 7 Days

यह एक ऐसा अमल है की (7) रातों की क़लील मुद्दत में पत्थर दिल भी मोहब्बत में दीवाना हो कर तालिब की क़दमों में आ गिरता है , फासला बे शक सात समंदर पार का भी हो तो मत्लूब बाद हवास हो कर हाज़िर हो जाता है . यह एक ऐसा अमल है की इस की مواکلات मोहब्बत पर मुसल्लत हो जाते हैं और मोहोब्बत को लम्हा बाह लम्हा बे चैन ो बेकरार करते हैं , यहाँ तक की वह तालिब की पास पहुंच जाता है .

ऐसी दबी मोहब्बत पैदा होती है की फिर उम्र भर जुड़ा नहीं होता , मगर नाजाइज़ कामों में अस्तमाल की हरगिज़ इजाज़त नहीं है अगर कोई नाजाइज़ अस्तमाल कर गए तो इस अमल की مواکلات इस की ज़िन्दगी अजीर्ण कर दें गेय और वह किसी काम का नहीं रहे गए .

Tarkeeb-e-Amal:

अमल की तरकीब इस तेरहन है की उरूज माह में نوچندی इतवार की रात से शुरू करें एक काग़ज़ पर इतवार की रात की तमाम منسوبات तहरीर करें और फिर मक़सद की अज़ीमत तहरीर करें . फिर इस काग़ज़ पर (7) दाने تفاح الجان के रखें और फलीता बना कर जलाएं और फलीता जलते वक़्त (70) मर्तबा मन्दर्जा ज़ैल आयत तिलावत करें और हर मर्तबा यह कहीं ؛(तालिब -ो -मत्लूब के नाम & मदर नाम के साथ )

“سلبت عقل فلاں بنت فلاں لعشق والمحبته فلاں بن فلاں”

फिर सोमवार की منسوبات और मक़सद की अज़ीमत और हस्ब इ साबिक़ फलता बना कर रोशन करें इसी तेरहन रोज़ाना हर दिन की منسوبات और अज़ीमत तहरीर करना हो गई , और आयत (70) मर्तबा पढ़ना हो गई . इंशा अल्लाह अज़्ज़वजल मत्लूब मोहब्बत में दीवाना ो बेकरार हो कर हाज़िर हो गए और जुदाई का कभी तसव्वुर भी नहीं करे गए , साया की तेरहन हमेशा साथ साथ रहे गए “आयत मुबारिकाः ” यह है .

بِسْمِ ٱللهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ ،زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنْطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَاللَّهُ عِنْدَهُ حُسْنُ الْمَآبِ (سورۂ آل عمران)آیت ١٤

और दिनों की منسوبات की जादूले यह है .

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