islamic wazaif for marriage | piyar se shadi ka wazifa

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فَسَيَكْفِيكَهُمُ اللّهُ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

(سورۃ البقرۃ،آیت 137)

मोहब्बत के अम्लियत में यह अमल श्री-उल -असर हैं लेकिन इसके लिए ज़रूरी हैं के आप के क़ल्ब में मेहबूब के लिए सचाई हो , ज़ेहन व क़ल्ब में किसी भी किसम की आलूदगी ना हो मेहबूब का ख़याल निहायत पुख्ता हो और इसे अपनी शरीक ज़िंदगी बनाने की आरज़ू इन्तहा हो , इस वज़ीफ़ा को शुरू करने से पहले (3) दिन से दरूद शरीफ का विरद हर वक़्त जारी रखे किसी भी वक़्त ग़ाफ़िल ना रहें तीसरे रोज़ अरूज माह की नो ’चाँदी जुमेरात या नेक सा ’ात में इस अमल को करें ,इंशाअल्लाह कामयाबी होंगे , यह अमल कुल (7) दिन का हैं इस आयत मुबारिक का जब भी विरद शुरू करें अव्वल व आखिर (11×11) मर्तबा दरूद शरीफ ज़रूर पढ़ें लेकिन एक बात का ख़याल रहे के नागा बिलकुल ना हनी पाए बिला नागा रोज़ाना आयत मुबारिक बा ’वुज़ू हालत में (101) मर्तबा पढ़ें , बाद पढ़ाने दुआ मांगे और दुआ में सिर्फ यह जुमले अदा करें ,

اﻟﻠﱠﮭُﻢﱠ اِﻧﱠﺎ ﻧَﺠْﻌَﻠُﻚَ ﻓِﻲ ﻧُﺤُﻮرِھِﻢْ وَ ﻧَﻌُﻮذُﺑِﻚَ ﻣِﻦْ ﺷُﺮُورِھِﻢْ

(अल्लाहुम्मा िन्ना नाज ’ालुका फि नुहुरिहिं व न ’ुधुबिका मं षुरूरिहिं )

इस अमल की बरकत से इंशाअल्लाह आप जिन अहबाब से मोहब्बत चाहते हैं हासिल हो जाये गए और लोग आप से मोहब्बत करने लगे गेय या जिस के लिए आप ने इस अमल में तसव्वुर रखा हैं वह आप से मोहब्बत करने लगे गए .

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بحرمت جبرائیل علیہ السلام و میکائیل علیہ السلام و اسرافیل علیہ السلام و عزرائیل علیہ السلام و توریت موسی و انجیل عیسی و قرآن محمد صلی اللہ علیہ و سلم قلب فلاں (مطلوب کا نام) الی

अगर अल्लाह पाक की अज़मत पैर यक़ीन हैं जिस क़दर अपनी सांस पैर यहाँ सांस बंद होये वहां ज़िंदगी तमाम एहि इस अमल पैर यक़ीन होना ज़रूरी हैं हाँ बाद ज़ेहन और बुरी नीयत वालो के लिए यह अमल कुछ काम नहीं करे गए इस लिए बेहतर अमल ना करें , अगर वाक़ये आप अपने मेहबूब से सच्ची मोहब्बत करते हैं तो इस अमल को बी ’फ़िक्र होकर करें ,इंशाअल्लाह कामयाब हों गेय अमल का तरीक़ा यौन हैं , अगर आप से कोई नाराज़ हैं और आप इससे मोहब्बत रखते हैं और इसे राज़ी करना चाहते हैं तो (21) दिन का अमल हैं आप सूरज तुलू हनी से पहले (40) मर्तबा इस इस चाहत को पढ़ें , इस वज़ीफ़ा को अगर आप ने हदायत के मुताबिक़ किया तो इंशाअल्लाह आप की दिल मुराद पूरी होंगे अल्लाह क़ुव्वत वाला अज़मत वाला हैं .

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بسم اللہ الرحمن الرحیم

سبحان الذی ویش خواھان من کن والحمداللہ زبانش گویائے من ولا الہ الااللہ چشم بتید من کن واللہ اکبر گوشش یاشنوائے من ولاحول ولا قوۃ الا باللہ العلی العظیم ھمہ تن و ھمہ جان فلاں بن فلاں کو مطیع و فرمانبردار من کن بحق ھذالکلام آمین

अगर आप चाहते हों के किसी को अपना मोती और तबे बनायें तो चाहिए के (14) दिन इसी तस्बीह को (100) मर्तबा वक़्त मुक़र्रर कर के पढ़ें बी ’हद असर तस्बीह हैं , लेकिन नेक नीयत के साथ यह वज़ीफ़ा करें ,इंशाअल्लाह कामयाबी होंगे , अरूज चाँद नेक सा ’ात में यह तस्बीह शुरू करें और एक बात का ख़ास ख़याल रखें मक़सद जाएज़ के लिए इस्तेमाल करें , मेहबूब का तसव्वुर कामिल होना चाहिए फिर कामयाबी यक़ीनी होंगे .

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بسم اللہ الرحمن الرحیم

قل ھواللہ الاحد یا جبریل یا اسرافیل اللہ الصمد یا میکائیل لم یا لد ام کائیکل ولم یولد عزرائیل لم یکن لہ وقعھائیل کفوااحد یا بدح اھیا اشراھیا یا عطوف یا شرفائیل یا ہمواکیل فلاں بن فلاں علی حب فلاں بن فلاں بے قرار و بے آرام شدہ یا شیخ عبدالقادر جیلانی شیا اللہ

तस्खीर इ मेहबूब के लिए यह वज़ीफ़ा मुजर्रब हैं , अरूज माह में पहले हफ्ते में पढ़ें कामयाबी यक़ीनी हो गए , (41) दाने काली मिर्च के ले कर हर दाने पैर पहले (3) दिन यह अमल पढ़े , दूसरे दिन (5×5) मर्तबा और तीसरे दिन (7) मर्तबा हर दाने पैर पढ़े , हर रोज़ कोयला की आग में वह डैम की होये मिर्च जला दिया करें यह अमल (7 ya 21) दिन में अपना असर दिखाए गए ,इंशाअल्लाह इसी अरसा में कामयाबी होंगे , मगर अपनी नीयत को पाक साफ रखें .

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دل کبوتر ہو رہا ہے، گھیرا پڑا یسین کا میرا ساجن میل دے، صدقہ محی الدی کا یا کریم و کرم کر یا رحیم و رحم کر سخت دل کو نرم کر یا غوث اعظم دستگیر میری فریاد میری فریاد میری فریاد

अमल कोई भी हो तसव्वुर इ मेहबूब का पुख्ता होना ज़रूरी हैं अगर आप के क़ल्ब व ज़ेहन पैर मेहबूब अपने पूरे वजूद के साथ मुजस्सिम नहीं तो मोहब्बत में कमी हैं या आप के ज़ेहन में कुछ और चल रहा हैं , अगर ऐसा हैं तो आप कोई भी अमल या वज़ीफ़ा कर के अपना वक़्त जाया कर रहे हैं , नो ’चाँदी जुमेरात से इब्तेदा करें और यह अमल बुध (Wednesday) वाले दिन ख़तम हो जाए गए यानि कुल (7) दिन का यह अमल हैं जब सूरज निकलने का टाइम हो तब किसी नहर , दरया या समुन्दर के किनारे या बहते पानी वाली जगह खरे हो कर अपना मौन सूरज की तरफ कर के तसव्वुर मेहबूब कामिल हो अव्वल व आखिर दरूद शरीफ के साथ इस वज़ीफ़ा को (100) मर्तबा पढ़ें , अमल में परहेज़ जलाली ज़रूरी हैं .

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