Namaz Hajat ka Tariqa | Love For Namaz

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Namaz Hajat ka Tariqa

इंसान  की  ज़िन्दगी   ख़्वाहिशात  से  भरी  होइ  हे , रोज़मर्रा  ज़िन्दगी  में  कोई  न  कोई  काम   ऐसा  होता  हे  क  जो  पूरा  नहीं  हो  रहा  होता , उस  को  पूरा  करनी  क  लिए  बोहत  साडी  रुकावटें  आद्य  आजाती  हैं , नमाज़  हाजत   ऐसी  हाजत  और  ज़रूरीअत  क  पूरा  करनी  क  लिए  एक  यक़ीनी  अमल  हे , ये  नमाज़  खास  तोर  पर  हाजत  क  पूरा  करवानी  क  लिए  बनाई  गई  हे , इस  नमाज़  की  अदायगी  क  बाद   आप  जॉब  ही  जैज़  हाजत  क  पूरी  होनी की  दुआ  मानगो  गए  वो  ज़ारोपोरी  हो  गई ,

हाजत  से  मुराद  कोई  खास  दुआ  नहीं  हे , आप  का  कोई  भी  काम  तकमील  क  मराहिल  तक  न  पुहंच  रहा  हो  तो  आप  उस  क  पूरा  होनी  क  लिए  नमाज़  हाजत  ऐडा  कर  क  दुआ  मांग  सकती  हो , एक्साम्स , रिजल्ट , जॉब , इंटरव्यू , बिज़नेस , शादी  अलग़रज़  आप  की  ज़िन्दगी  का  हारक  ऍम  जिस  में  मुश्किल   दर  पेश  हो  उस  क  पूरा  होनी  क  लिए  आप  नमाज़    ऐडा   करो  और  ाजजी  ो  इनकेसरी  से  अपनी  अल्लाह  से  उस  हाजत  क  पूरा  होनी  की  दुआ  करो , वो  समी  हे  आप  की  ज़रूर  सुनी  गए  और  आपका  काम  होजाय  गए .

नमाज़  हाजत   किसी   भी  हाजत  को  पूरा  करनी  क  लिए  बेहतरीन  अमल  हे , इस  अमल  की  बरकत  से  मुश्किल  से  मुश्किल  हाजत  भी  पूरी  होजाती  हे , ये  इंतहाई  पावरफुल  अमल  हे , पोरी  यक़ीन  से  ये  अमल  करें  और  फिर  इस  क  नीटाइज  देखें , आप  की  हर  हाजत  मिनटों  में  पूरी  होजाय  गई , जॉब  ही  रुकावटें  हों  गई  वो  ख़तम  हो  जैन  गई ,

Namaz Hajat ka Tariqa

बारे  क़ज़य  हाजत  ये  २  रकत   नमाज़  मुजारीब  हे , पहली  रकत  में  सोरह  फातिहा  क  बाद  आयात  अल  कुर्सी  पढ़ी , दूसरी  रकत  में  सोरह  फातिहा  क  बाद  सोरह  क़दर  (िन्ना  अन्ज़लना ) पढ़ी , और  सलाम  क  बाद  ये  दुआ  पढ़ी  “अल्लहुमा  मन  ारसलता  हु  िला  ख़लक़ि  का  व  बे  हक़  इ  कुल  इ  ायतीन  फेहे , व  बे  हक़  इ  मिढ़ातीं  फेहे  अलैका  वाला  नुसरीफु  ाहदान  ारीफु  बे  हक़ीक़ा  मं  का ”  फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  मुहमदीन ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  अली ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “ बे  हक़  इ  फातिमा ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “ बे  हक़  इ  हसन ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  अली  इब्न  अल  हुसैन ” फिर  १०  मर्तबा  “ बे  हक़  इ  मुहम्मद  इब्न  इ  अली ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  जफ़र  इब्न  इ  मुहम्मद ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  मौसा  इब्न  इ  जफ़र ”  फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  अली  इब्न  इ  मौसा ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “ बे  हक़  इ  मुहम्मद  इब्न  इ  अली ” फिर  १०  मर्तबा  कही  “ बे  हक़  इ  अली  इब्न  इ  मुहम्मद ”  फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  अल  हसन  इब्न  इ  अली ”  फिर  १०  मर्तबा  कही  “बे  हक़  इ  मुहम्मद  इब्न  अल  हसन ” फिर  अपनी   हाजत  हज़रात  मुहम्मद  (सॉ ) और  ाल  इ   मुहम्मद  (सॉ ) का  वसीला  दी  कर  तालाब  करें , इन  श  अल्लाह  आप  की  हाजत  पूरी  हो  जय  गई  और  मुराद  बार  आय  गई .

नमाज़  हाजत  बोहत  ही  पावरफुल  अमल  हे , इस  की  बरकत  से  आप   की  हर  हाजत  पूरी  हो  जय  गई , पोरी  खुशो  ो  खुज़ु  क  साथ  नमाज़  ऐडा  करें  और  दुआ  मांगें , अल्लाह  तल्लाह  क  फज़ल  ो  करम  से  आप  की  दुआ  रेड   नहीं  हो  गई , आप  जॉब  ही  मक़सद  लय  कर  आय  हो  ग  वो  ज़रूर  पूरा  होगा , आपकी  हाजत  पूरी  होजाय  गई .

किसी  भी  हाजत  को  पूरा  करनी  क  लिए  नमाज़  हाजत  ऐडा  करें  और  अपनी  अल्लाह  से  उस  हाजत  क  पूरा  होनी  की  पावरफुल  दुआ  करें , वो  आप  की  दुआ  रेड  नहीं  कार्य    गए  और   की  ख्वाहिश  ज़रूर  पूरी  कार्य  गए

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